पुराणों में पीपल के वृक्ष के महत्व का विस्तार से वर्णन किया गया है |महामुनि व्यास के अनुसार प्रात: स्नान के बाद पीपल का स्पर्श करने से व्यक्ति के समस्त पाप भस्म हो जाते हैं तथा लक्ष्मी की प्राप्ति होती है |उसकी प्रदक्षिणा करने से आयु में वृद्धि होती है |अश्वत्थ वृक्ष को दूध ,नैवेद्य ,धूप -दीप ,फल -फूल अर्पित करने से मनुष्य को समस्त सुख -वैभव की प्राप्ति होती है |
पीपल की जड़ के निकट बैठ कर जो जप ,दान ,होम ,स्तोत्र पाठ व अनुष्ठान किया जाता है उनका फल अक्षय होता है |पीपल की जड़ में श्री विष्णु ,मध्य में शिव -शंकर तथा अग्र भाग में ब्रह्मा स्थित होते हैं अतः उस को प्रणाम मात्र से ही समस्त देवता प्रसन्न हो जाते हैं |पीपल के नीचे किया गया दान अक्षय हो कर जन्म -जन्मान्तरों तक फलदाई होता है |जिस प्रकार संसार में गौ ,ब्राह्मण व देवता पूजनीय हैं उसी प्रकार पीपल भी पूजा के योग्य है |
पीपल को रोपने से धन ,रक्षा करने से पुत्र ,स्पर्श करने से स्वर्ग एवम पूजने से मोक्ष की प्राप्ति होती है |जो व्यक्ति पीपल को काटता या हानि पहुंचाता है उसे एक कल्प तक नर्क भोग कर चांडाल की योनी में जन्म लेना पड़ता है |
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Friday, October 31, 2008
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